
आज भी देश के अन्य भागोँ की अपेक्षा यहाँ उजडे हुए गांव अधिक मात्रा मे है.ईन आक्रमणोँ की वजह से ईस वंश को बहुत ही हानी हुई है एवं क्षती उठानी पडी है.ईसके विपरीत भी उन्होने विदेशी शत्रुओँ एवं आक्रमण कारीयोँ के सामने विवशता नही दिखाई.तरावडी की पहले युद्ध मे ईस वंश के वीरो ने सम्राट पृथ्वीराज चौहाण का साथ दिया था ऐसा बडवोँ द्वारा लिखे ईतिहास मे उल्लेख मिलता है.मोहम्मद घुरी को करारी हार का मजा चखा कर ईस वंश के रणबांकुरोँ ने घुरी को सम्राट के आगे नतमस्तक किया था.सन 1522 मे खानवा युद्ध मे ईन्होने महाराणा संग्राम सिँह जी उर्फ महाराणा सांगा को सहायता प्रदान की थी.सन 1398 मे जब तैमुर लंग समस्त पंजाब को रौंदता हुआ आंधी की तरह ईस क्षेत्र मे प्रविष्ट हुआ तो उसे स्थान स्थान पर करारी शिखस्त मिली.पोलड का वह स्थान आज भी ईन वीरोँ की बहादुरी को बयान करता है.असंध और सालवान मे भी मंडाडा ने तैमुर का डटकर मुकाबला किया.इतने बडे आक्रमण कारी,जिसने दिल्ली मे खुन की नदियाँ बहा दी थी,उसके जीवन की यह सबसे बडी हार थी.यही कारण था जिस वजह से तैमुर मेरठ से हरीद्वार के मार्ग से वापिस भागा था.बाबर के शासनकाल मे मोहन सिँह मंडाड ने असंख्य मुगलो को मौत की नीँद सुलाकर हिँदुत्व की रक्षा की थी.
औरंगजेब जैसे धर्मांध बादशहा के विरोध मे ईन्होने राठौडोँ को मार्ग दिखाया और दुर्गादास के संरक्षण मे कुँवर अजित सिँह को करनाल से घरौँडा और पानीपत के मार्ग से दिल्ली पहुँचाया.ब्रिटिश शासनकाल मे भी ईस वंश की वीरांगनाए कम नही है.कट्टर राष्ट्रधारा के कारण यह क्षेत्र हमेशा अंग्रेजोँ के आँखोँ का काँटा बना रहा.गांधीजी के असहयोग आंदोलन,भारत छोडोँ आंदोलन व अन्य सभी राष्ट्रीय आंदोलनो मे ईस वंश ने बढ चढकर भाग लिया.फलस्वरुप यहाँ के अनेक वीरोँ को अपने प्राणोँ की आहुती देनी पडीँ.वहाँ के लोकजीवन मे आज भी मंडाडा के वीरोँ की झलक मिलती है.
"मुस्लिम हो या गोरे,
उनसे खुब लढे मंडाडा के छोरे"
यह कहावत बहुत प्रसिद्द है.इसका भावार्थ यह है कि मडाड वंश जहाँ देश रक्षा के कार्यो मे सदैव आगे रहा वही अपने पडोसी चंद्रवंशी तंवर राज्य व अग्नीवंशी चौहाण राज्योँ को भी सदा सहायता प्रदान करते रहे.तभी यह वंश "बसे बडे मंडाडे" की उपाधी से सम्मानीत किया गया है.
अब ईस वंश के क्षत्रिय करनाल,कैथल,जीँद के लगभग 60 गांवो मे बसते है.इनके अलावा भिवानी,अंबाला,पंजाब के पटियाला,रोपड यु.पी के सहारनपुर,मेरठ,मुजफ्फरनगर और चंदीगढ मे भी इस वंश के लोग रहते है.
:-योगेश गर्ग/कलायत से
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