क्रमांक नाम गोत्र वंश स्थान और
जिला
1 सूर्यवंशी कश्यप् सूर्य बुलन्दशहर आगरा मेरठ अलीगढ
2 गुहिलवन्शी गहलोत बैजपायण सूर्य मथुरा कानपुर और पूर्वी जिले
3 गुहिलवन्शी सिसोदिया बैजपायन् , सूर्य महाराणा उदयपुर स्टेट
4 कछवाहा मानव्य् सूर्य महाराजा जयपुर और ग्वालियर राज्य
5 राठोड कश्यप, सूर्य जोधपुर बीकानेर और पूर्व और मालवा
6 सोमवंशी अत्रैय चन्द प्रतापगढ और जिला हरदोई
7 यदुवंशी अत्रैय चन्द राजकरौली राजपूताने में
8 भाटी अत्रय जादौन महारजा जैसलमेर राजपूताना
9 जडेजा अत्रय यदुवंशी महाराजा कच्छ भुज
10 जादवा अत्रय जादौन अवा. कोटला ऊमरगढ आगरा
11 तन्वर व्याघ्र चन्द पाटन के राव तंवरघार जिला ग्वालियर
12 कटियार व्याघ्र तोंवर धरमपुर का राज और हरदोई
13 पालीवार व्याघ्र तोंवर गोरखपुर
14 परिहार कौशल्य अग्नि मंडोर (जोधपुर) एवं मध्यप्रदेश
15 तखी कौशल्य परिहार पंजाब कांगडा जालंधर जम्मू में
16 पंवार वशिष्ठ अग्नि मालवा मेवाड धौलपुर पूर्व मे बलिया
17 सोलंकी भारद्वाज अग्नि राजपूताना मालवा सोरों जिला एटा
18 चौहान वत्स अग्नि राजपूताना पूर्व और सर्वत्र
19 बिष्ट भारद्वाज अग्निवंशी, सूर्यवंशी प्राचीन में राजपूताना, यू.पी.
20 बिष्ट शान्डिल्य अग्निवंशी, सूर्यवंशी प्राचीन राजपूताना और यू.पी.
21 हाडा वत्स चौहान कोटा बूंदी और हाडौती देश
22 खींची वत्स चौहान खींचीवाडा मालवा ग्वालियर
23 भदौरिया वत्स चौहान नौगंवां पारना आगरा इटावा गालियर
24 देवडा वत्स चौहान राजपूताना सिरोही राज
25 शम्भरी वत्स चौहान नीमराणा रानी का रायपुर पंजाब
26 बच्छगोत्री वत्स चौहान प्रतापगढ सुल्तानपुर
27 राजकुमार वत्स चौहान दियरा कुडवार फ़तेहपुर जिला
28 पवैया वत्स चौहान ग्वालियर
29 गौर ,गौड भारद्वाज सूर्य शिवगढ रायबरेली कानपुर लखनऊ
30 वैस भारद्वाज चन्द्र उन्नाव रायबरेली मैनपुरी पूर्व में
31 गेहरवार कश्यप सूर्य माडा हरदोई उन्नाव बांदा पूर्व
32 सेंगर गौतम ब्रह्मक्षत्रिय जगम्बनपुर भरेह इटावा जालौन
33 कनपुरिया भारद्वाज ब्रह्मक्षत्रिय पूर्व में राजाअवध के जिलों
में हैं
34 बिसैन वत्स ब्रह्मक्षत्रिय गोरखपुर बलिया गोंडा प्रतापगढ में हैं
35 निकुम्भ वशिष्ठ सूर्य गोरखपुर आजमगढ हरदोई जौनपुर
36 सिरसेत भारद्वाज सूर्य गाजीपुर बस्ती गोरखपुर
37 च्चाराणा दहिया चन्द जालोर, सिरोही केर्, घटयालि, साचोर, गढ बावतरा,
38 कटहरिया वशिष्ठ सूर्य बरेली बंदायूं मुरादाबाद शहाजहांपुर
39 वाच्छिल अत्रयवच्छिल चन्द्र मथुरा बुलन्दशहर शाहजहांपुर
40 बढगूजर वशिष्ठ सूर्य अनूपशहर एटा अलीगढ मैनपुरी मुरादाबाद हिसार
गुडगांव जयपुर
41 झाला मरीच कश्यप चन्द्र धागधरा मेवाड झालावाड कोटा
42 गौतम गौतम ब्रह्मक्षत्रिय राजा अर्गल फ़तेहपुर
43 रैकवार भारद्वाज सूर्य बहरायच सीतापुर बाराबंकी
44 करचुल हैहय कृष्णात्रेय चन्द्र बलिया फ़ैजाबाद अवध
45 चन्देल चान्द्रायन चन्द्रवंशी गिद्धौर कानपुर फ़र्रुखाबाद
बुन्देलखंड पंजाब गुजरात
46 जनवार कौशल्य सोलंकी शाखा बलरामपुर अवध के जिलों में
47 बहरेलिया भारद्वाज वैस की गोद सिसोदिया रायबरेली बाराबंकी
48 दीत्तत कश्यप सूर्यवंश की शाखा उन्नाव बस्ती प्रतापगढ जौनपुर
रायबरेली बांदा
49 सिलार शौनिक चन्द्र सूरत राजपूतानी
50 सिकरवार भारद्वाज बढगूजर ग्वालियर आगरा और उत्तरप्रदेश में
51 सुरवार गर्ग सूर्य कठियावाड में
52 सुर्वैया वशिष्ठ यदुवंश काठियावाड
53 मौर्य गौतम सूर्य बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान
54 टांक (तत्तक) शौनिक नागवंश मैनपुरी और पंजाब
55 गुप्त गार्ग्य चन्द्र अब इस वंश का पता नही है
56 कौशिक कौशिक चन्द्र बलिया आजमगढ गोरखपुर
57 भृगुवंशी भार्गव चन्द्र वनारस बलिया आजमगढ गोरखपुर
58 गर्गवंशी गर्ग ब्रह्मक्षत्रिय नृसिंहपुर सुल्तानपुर , मार्टींनगँज आजमगढ
59 पडियारिया , देवल ब्रह्मक्षत्रिय राजपूताना
60 ननवग कौशल्य चन्द्र जौनपुर जिला
61 वनाफ़र पाराशर, कश्यप चन्द्र बुन्देलखन्ड बांदा वनारस
62 जैसवार कश्यप यदुवंशी मिर्जापुर एटा मैनपुरी
63 नैय्दु वैक्ला सूर्य दक्षिण मद्रास तमिलनाडु अन्ध्र कर्नाटक में
64 निमवंशी कश्यप सूर्य संयुक्त प्रांत
65 वैनवंशी वैन्य सोमवंशी मिर्जापुर
66 दाहिमा गार्गेय ब्रह्मक्षत्रिय काठियावाड राजपूताना
67 पुण्डीर कपिल ब्रह्मक्षत्रिय पंजाब गुजरात रींवा यू.पी.
68 तुलवा आत्रेय चन्द्र राजाविजयनगर
69 कटोच कश्यप भूमिवंश राजानादौन कोटकांगडा
70 चावडा,पंवार,चोहान,वर्तमान कुमावत वशिष्ठ पंवार की शाखा मलवा
रतलाम उज्जैन गुजरात मेवाड
71 अहवन वशिष्ठ चावडा, कुमावत खेरी हरदोई सीतापुर बारांबंकी
72 डौडिया वशिष्ठ पंवार शाखा बुलंदशहर मुरादाबाद बांदा मेवाड गल्वा
पंजाब
73 गोहिल बैजबापेण गहलोत शाखा काठियावाड
74 बुन्देला कश्यप गहरवारशाखा बुन्देलखंड के रजवाडे
75 काठी कश्यप गहरवारशाखा काठियावाड झांसी बांदा
76 जोहिया पाराशर चन्द्र पंजाब देश मे
77 गढावंशी कांवायन चन्द्र गढावाडी के लिंगपट्टम में
78 मौखरी अत्रय चन्द्र प्राचीन राजवंश था
79 लिच्छिवी कश्यप सूर्य प्राचीन राजवंश था
80 बाकाटक विष्णुवर्धन सूर्य अब पता नहीं चलता है
81 पाल कश्यप सूर्य यह वंश सम्पूर्ण भारत में बिखर गया है
82 सैन अत्रय ब्रह्मक्षत्रिय यह वंश भी भारत में बिखर गया है
83 कदम्ब मान्डग्य ब्रह्मक्षत्रिय दक्षिण महाराष्ट्र मे हैं
84 पोलच भारद्वाज ब्रह्मक्षत्रिय दक्षिण में मराठा के पास में है
85 बाणवंश कश्यप असुरवंश श्री लंका और दक्षिण भारत में,कैन्या जावा में
86 काकुतीय भारद्वाज चन्द्र, प्राचीन सूर्य था अब पता नही मिलता है
87 सुणग वंश भारद्वाज चन्द्र, पाचीन सूर्य था अब पता नही मिलता है
88 दहिया कश्यप राठौड शाखा मारवाड में जोधपुर
89 जेठवा कश्यप हनुमानवंशी राजधूमली काठियावाड
90 पांड्य अत्रय चन्द अब इस वंश का पता नहीं
90 पठानिया पाराशर वनाफ़रशाखा पठानकोट राजा पंजाब
91 भैंसोलिया वत्स चौहान भैंसोल गाग सुल्तानपुर
92 चन्दोसिया भारद्वाज वैस सुल्तानपुर
93 चौपटखम्ब कश्यप ब्रह्मक्षत्रिय जौनपुर
94 जायस कश्यप राठौड की शाखा रायबरेली मथुरा
95 जरोलिया व्याघ्रपद चन्द्र बुलन्दशहर
96 जसावत मानव्य कछवाह शाखा मथुरा आगरा
97 जोतियाना कश्यप कछवाह मुजफ़्फ़रनगर
98 घोडेवाहा मानव्य कछवाह शाखा लुधियाना होशियारपुर जालन्धर
99 कछनिया शान्डिल्य ब्रह्मक्षत्रिय अवध के जिलों में
100 काकन भृगु ब्रह्मक्षत्रिय गाजीपुर आजमगढ
102 उदमतिया वत्स ब्रह्मक्षत्रिय आजमगढ गोरखपुर
103 भाले वशिष्ठ पंवार अलीगढ
104 भालेसुल्तान भारद्वाज वैस रायबरेली लखनऊ उन्नाव
105 जैवार व्याघ्र तंवर दतिया झांसी बुन्देलखंड
106 सरगैयां व्याघ्र सोमवंश हमीरपुर बुन्देलखण्ड
107 किसनातिल अत्रय तोमरशाखा दतिया बुन्देलखंड
108 टडैया भारद्वाज सोलंकीशाखा झांसी ललितपुर बुन्देलखंड
109 खागर अत्रय यदुवंश शाखा जालौन हमीरपुर झांसी
110 निर्वाण वत्स चौहान राजपूताना (राजस्थान)
111 जाटू व्याघ्र तोमर राजस्थान,हिसार पंजाब
112 नरौनी मानव्य कछवाहा बलिया आरा
113 भनवग भारद्वाज कनपुरिया जौनपुर
114 गिदवरिया वशिष्ठ पंवार बिहार मुंगेर भागलपुर
115 बघेल कश्यप सूर्य रीवा राज्य में बघेलखंड
116 कटारिया भारद्वाज सोलंकी झांसी मालवा बुन्देलखंड
117 रजवार वत्स चौहान पूर्व मे बुन्देलखंड
118 द्वार व्याघ्र तोमर जालौन झांसी हमीरपुर
119 इन्दौरिया व्याघ्र तोमर आगरा मथुरा बुलन्दशहर
120 छोकर अत्रय यदुवंश अलीगढ मथुरा बुलन्दशहर
121 जांगडा वत्स चौहान बुलन्दशहर पूर्व में झांसी
122 राठौर शान्डिल्य सूर्य सीतामढ़ी,हाजीपुर,मारवाड़
द्वारा - सुश्री शिखा सिंह
Good editing
ReplyDeleteGood editing
ReplyDeleteGood editing
ReplyDeleteलोहथम्भ (लोहतमिया) भारद्वाज सूर्य वंश आरा बलिया गाजीपुर
ReplyDeleteरैकवार तो केवट/निषाद जाति मे आते है
Deleteरैकवार तो अच्छे राजपूत गिने जाते है। शायद राठौर वंश से है।
DeleteRight
DeleteBilkul sahi kaha par is Rajvash ka history Rathore vansh se v prachin hai kyuki is vansh ke founder Shree Ram's brother Bharat ji the jo gandhar vansh kahlaya jis vansh ke King Raka dev ji ne Raikgarh basaya tab se ise Raikwar Rajvash se jana jata hai..inhe bhojpuri bhasa me misspelled kake laikwar Rajvash v kahte hai log..inke Rajvash ke gotra -vashista aur Bhardwaj milte hai
DeleteAvi v Ramnagar dhameri state ke Maharaja v isi Rajvash se hai un ke pas is vansh se related Aur v jankari hai..Rajput ho to Rajput ka sam-man kigiye aap jitna jante ho utna hi satya ho koi jaruri nhi isliye Nishad bana ke apni garima mat kam karaiye dhanayawab
Deleteसिंघेल राजपूत बिहार के छपरा जिला के इसुआपुर प्रखंड के सहवाँ गाँव तथा सालमापुर में हैं और mau में भी है हमको fb से पता चला
Deleteजी मऊ में सिंघेल नही खींची राजपूत है।
Deleteरैकवार में वशिष्ठ गोत्र भी हैं बिहार के बक्सर ज़िले में एवं ये राठौर के शाखा हैं।
ReplyDeleteकृप्या बिष्टजाती जो नेपालके दार्चुला और बैतडी जिला लगायत अन्य जगहपर रहने वालौके सम्वन्धमे जिसको जो भि जानकारी है लिखे।
ReplyDeleteबिष्ट जाती के ठाकुर नेपाल में कहीँ नही सुना जो कि मैं खुद नेपाल से हूँ इंडिया में उत्तराखंड में बिस्ट ठाकुर होते है
Deleteशाह शाही मल्ल सिंह हमाल चंद सेन चौहान राठौर पाल यह सब नेपाल में ठाकुरो में आते है पर
बिष्ट का तो पता नही आप गोगल करलो
Usefull information
ReplyDeletePresent time me har koi rajput me milna chahta he
ReplyDeleteQki eska nam kafee had tk prasidhdh ho chuka hw
हेमेंद्र जी आपकी सोच गलत है जो राजपूत वही राजपूत कहने का साहस कर सकता है आप अपने अतिरिक्त कितनी राजपूत खापों को जानते है 4568 खाप अभी तक प्रमाणित हो चुकी है राजपूत क्यो बनेगा कोई अन्य जाती का व्यक्ति अपना नुकशान करने के लिए एक क्या उसका पूरा समाज जुड़ेगा तो क्यो अपनी सुविधाएं खोएगा ओर फर्जी राजपूत कहलायेगा ओर बेइज्जती सहन करेगा जिनका गौरव शाली क्षत्रिय इतिहास है वह है ही राजपूत आप माने या न माने इसी सोच के कारण क्षत्रिय एकता छीन भिन्न हो गुई है
Deleteसिंघेल राजपूत बिहार के छपरा जिला के इसुआपुर थाना के सहवाँ और सालमापुर में हैं
DeleteJin jin vansho ne rajya kiya he real rajput bo hi he baaki to naam me hi pagla rahe he
ReplyDeleteQki provlm ek or he bo he rajputo me ladkiyo ki kami isliye bo bahla fusla kr ki tum vi rajput ho kahkar un logo me restedari suru kr diye he
Jisse inka khoon ganda hone lga he
Milavat
Khichdi ho gaya he re brahmin rajput he gadariya rajput he kachhi rajput he lodhi rajput he goojar rajput he ye tomar bhati jhala devra pawar aur raghuwansi ye sb rajput he
ReplyDeleteBastbikta me ye sab alag alag jatiya he
Khichdi kr deya re gangu
Chl hurt re madrbhagat
Mere bhai bina varn k koi jati nahi hoti..varna matlab gun hota hai.aur paisa matlab jati nahi hota...lodhi kyuki obc mai listed hai log unko Kshatriya ke rup mai pacha nahi pate par logo ko kopach bhale hi ho jo hai so hai...bolne se jatiya ya varn nahi vadalte aur koi rajput mai kyu milna chhahega rajput surname Kshatriya varn ko represent karta hai isiliye likha jata hai ristedari karne k liye nahi...
Deleteअबे चूतिए पंवार परमार की ही गोत्र है रघुवंशी स्वयं श्री राम थे तोमर भी राजपूत होते है
Deleteतू कोंन है जो इतिहास का ज्ञान बाट रहा है
अत्यंत सराहना योग्य सद्प्रयास के लिये कोटिश:
ReplyDeleteनमन ।दिनेश प्रताप सिंह गौर बीहट गौर सीतापुर
कृपया मुझे *सुरवार राजपूत-गर्ग गोत्र-वंश सूर्य-कठियावाड़ के बारे में कुछ विस्तार से बताएँ. क्या इन्हें सूर्यवंशीय क्षत्रिय कहना उचित होगा?
ReplyDeleteबताने के लिए हम आपके आभारी होंगे.
श्री राजेश सिंह
देवरिया,उत्तर प्रदेश।
सुरवार गौड या गौर सूर्यवंशी राजपूतों की उपशाखा है। बिहार झारखंड में है।
Deleteसुरवार कहने में क्या तकलीफ है, गर्व करिये की आप गर्ग गोत्रीय सुरवार हैं ।
Deleteजय भवानी
सुरवार कहने में क्या तकलीफ है, गर्व करिये की आप गर्ग गोत्रीय सुरवार हैं ।
Deleteजय भवानी
जिसने भी यह लेख लिखा है गलत लिखा है
ReplyDeleteमालुम हो कि सभी बघेलो के गोत्र भारद्वाज है
कृपया इसे सुधारें फिर अपलोड करें
बिलकुल सही कहा आपने
DeleteThis comment has been removed by the author.
Deleteलेखक ने काफी सही लिखा हे ।पर अभी भी इस लेख मे कई ब्रहमण क्षत्रिय बने बेठे हे ।ओर इस राजपूतो को जगह नही देनी चाहिये ।
Deleteसही कहा आपने सभी बाघेल/बघेलों का गोत्र भारद्वज है
Deleteजिसने भी यह लेख लिखा है गलत लिखा है
ReplyDeleteमालुम हो कि सभी बघेलो के गोत्र भारद्वाज है
कृपया इसे सुधारें फिर अपलोड करें
यह गलत लेख लिखा है !कृपया इसे सुधार लें।क्योंकि जरोरिया नाम का कोई वंश नहीं है
ReplyDeleteयह गौर या गौड़ वंश के लोग हैं जो बुलन्दशहर में रहते हैं।जिन्हें यहाँ जड़ोलिया नाम से जाना जाता है।क्योंकि जाड़ोल नामक स्थान पर राजस्थान से आये हुए गौड़ वंशजों से उत्पन्न हैं। जोकि १३००-१४०० ईसवी में यहाँ आये थे।
झाडोल उदयपुर के पास है। लेकिन यहाँ गौडों का राज नहीं रहा है। आप इनके बारे में विस्तार से जानकारी देवें।
Deleteगौर को ही जडोलिया बोल दिया जाता हैं ,आपने बिलकुल सही कहा हैं....मैं जड़ोल के पास का ही रहने वाला हु ....
Deleteगौर को ही जडोलिया बोल दिया जाता हैं ,आपने बिलकुल सही कहा हैं....मैं जड़ोल के पास का ही रहने वाला हु ....
Deleteगौर वंश के बारे में और बताये
Deleteगौर और गौड़ एक ही है क्या
जडोल गॉव हैं यह भीलवाडा जिले में आमेट तहसील में हैं |यह गॉव काफी प्राचीन हैं |
Deleteअति सुंदर और ज्ञानवर्धक पोस्ट
ReplyDeleteधन्यवाद
रैकवार तो निषाद/केवट जाति मे आते है
ReplyDeleteRaikwar Rajput ki upjati ka name hai jo Rathore vansh ki sabse prachin branch hai aur ye piche dekhne se milega ki ye Raghuvanshi Ram Chandra ji ke chhote bhai bharat ji se taluk rakhta hai..Iski adhik jankari ke liye aap Ramnagar dhameri riyasat ke Abhilekh dekh sakte hai..
Deletebahut sahi chhatriya vansh ka .....
ReplyDeleteMer/mihir/merwada-rajsakha, keshwala, chavda, chouhan, parmar etc. Kshatriya vansh ke bare me batayein
ReplyDeleteI am Devendra Singh belong to rajasthani/gujarati culture
ReplyDeleteKripya ambedkar nagar me rautar ,sandilya gotra ke bare me jankari de Indra pal sinfh
DeleteKripya ambedkar nagar me rautar ,sandilya gotra ke bare me jankari de Indra pal sinfh
Deleteसांडिल्य तो ऋषि गोत्र है वे ब्राह्मण भी होते है अपना प्रवर या वन्स गोत्र बताये शाखा या गोत्र कर्ता का नाम बताये ऐसे बहुत से लोग सांडिल्य हो सकते है
DeleteNice
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteKya sain Rajput hote he?
ReplyDeleteहाँ सैन राजपूत है
Deleteसेन तो नाई जाति लिखती है तो सेन राजपूत केसे हुये ?
Deleteजबकि असल मैं इस जाति का सुद्ध शब्द न्यायी है,
हमारे हिंदुस्तान के मगध साम्रराज्य से पहले राजा महापदम नन्द बंशी नन्द बंश के इस जाति से हुये, उनके साथ समय बदलाभ के साथ उनके पुत्र राजा चन्द्रंगुप्त नन्द बंशी जो नन्द से मौर्य खुद अपनी माँ मोरा के नाम अनुसार उजागर हुये साथ ही नन्द बंश से मौर्य बंश का जन्म होगा साथ ही समय के चलते चलते बिंदुसार राजा मौर्य हुये और उनके पुत्र महान अशोक सम्राट चक्रवर्ती जी
मौर्य खुद से भारत बर्ष न्यायी नीभ जीत कर अपना परचम फेला दिया अपनी न्याय ब्यवस्था से पूरे भारत बर्ष तक जीतकर ।
"जय हिंन्द"
जय भारत ।।
Shaky bans se moury
DeleteHuye
Balendu's are also kshatriya. Found in vindhya region.
ReplyDeleteक्या राजपूतौं मे राघव वंश के राजपूत भी होते हैं क्या ।
ReplyDeleteराघव मूलतः प्रतिहार है।
Deleteगलत सूचना ,राघव सूर्य वंशी राजपूत है इस्क्वाकू वंशी वशिष्ट ऋषि गोत्र धारक गद्दी दक्षिण कौशल है
Deleteखेड़ा कोंन है सविस्तार बताइये
Deleteबड गुजर को राघव कहते हैं
Deleteबडगुजर राजपूत को राघव कहते हैं
Deleteजी हां राघव राजपूत होते है राघव रघुवंशी सूर्यवंश की ही साखा है
Deleteराणावत राजपूत
ReplyDeleteराणावत राजपूत का इतिहास
DeleteKachwaha में राणावत आते हैं
Deleteराणावत राजपूत सिसोदिया मे आते है जो कि महाराजा प्रताप जी कि पाँच वी रानी के बेटे कल्याणदास जी के वंशज है होक्म 9166584188 लोकेन्र्द सिंह राणावत ठिकाना बनकोडा ज़ि डूंगरपूर
DeleteJai rajputana...
ReplyDeleteJai rajputana...
ReplyDeleteजय राजपूताना यूनिटी, बहुत-बहुत धन्यवाद इस शोध के लिए आप सभी को
ReplyDeleteपचौरियों के बारे में बताइये
ReplyDeleteहा मै भी हू
DeleteSinghel in mau
ReplyDeleteगुजरात के क्षत्रिय ठाकोर(गुजराती)ठाकुर(हिन्दी) को आप क्या समझते हो?
ReplyDeleteJai ma bhawani jai rajputana
ReplyDeleteसैंथवार क्षत्रियों के बारे में बतायें , चूंकि मैं इस बात को भली भांति अध्ययन किया और यह पाया की यह समाज बहुत ही मजबूत है और बहुत सारे राजपूत क्लेन द्वारा यह बना हुआ है । कृपया प्रकाश डालें ...
ReplyDeleteसैंथवार मल्ल राजपूत राजाओं के वशज हैं पर ये समाज गोरखपुर के जिलों में है।
Delete😁😁😁bina puri jankari ke pages kyun banati ho isme abhi kai kshatriya ka naam nahin jai jaise parmar bais shrinet dekaha lohthamb etc.
DeleteKai kshatriya upjatiya chuut gyi hai iss list me jaise Senger ,Dhanwast (dono Brahma Kshatriya) jo ki up me paaye jatey hai...
ReplyDeleteKuch ke gotra galat likhe hai sudhar ki awashyakta hai
Thank you
Too good dear.... you have done great job👍🏻👍🏻👍🏻
ReplyDeleteBina puri jankari ke pages banana band Karo isme bahut sari kshatriya jatiyan chhut gayi hain kripya karke use add karo adhura gyan khatarnak hota hai.
ReplyDeleteप्रयास की सराहना कीजिये जो जानकारी जिसके पास है साझा करें सबको जानकारी सम्पूर्ण नही है अभी 4568 राजपूत खाप प्रमाणित हुई है क्या सभी जबानी याद है क्षत्रिय वंशार्णव से नकल करनी पड़ेगी
Deleteराजपुत बरूवार वंश की भी जानकारी दे
ReplyDeleteगौर वंश की स्थापना कब हुई और वास्तव में गौर कहा कि निवाशी थे ।
ReplyDeleteइसके वंश का कोई राजा बना है कभी जो प्रसिद्ध हुआ हो कभी
सिंघेल वंश के बारे में हम तो बिहार छपरा थाना इसुआपुर pin 841411 ग्रामपोस्ट सहवाँ में हैं और जानकारी चाहते हैं कहा कहा हैं और सिंघेल
ReplyDeleteMall saithwar rajput also raghuvanshi
ReplyDeleteShashi kaha apne mall-saithwar raghuvanshi hai
DeleteSaithawar rajput ke bare me bhi likhiye sir
ReplyDeleteबघेल क्षत्रिय जिनका गोत्र भारद्वाज हैं जनपद देवरिया उत्तर प्रदेश के ग्राम अहिरौली बघेल, पिपरा बघेल, बहियारी बघेल में सबसे ज्यादा है|जय क्षत्रिय समाज आप का वरुण सिंह बघेल एडवोकेट उपाध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ देवरिया उत्तर प्रदेश
ReplyDeleteRight chacha ji
DeleteRight chacha ji
Deleteआप ब्रहमण हो ।क्षत्रिय नही भारद्वाज ब्रहाम्ण होते हे।
Deleteठाकुर बन जाने से क्षत्रिय नही बन जाते ।
Deleteभारद्वाज गौत्र होता है राजपुतो का
DeleteSainthwar kshatriya ke bare jankari Pradan kare.
ReplyDeleteBolo chiya konse rajput ka gotra hai
ReplyDeleteMalla Kshatriya hotey hi ky
ReplyDeleteरोहिलखण्ड के रोहिला राजपूतो के विषय मे बताये,909 से 18वी सदी तक शासन किया 400 वर्ष तक सल्तनत काल मे दिल्ली के सुलतानों को धूल चटाई उत्तर प्रदेश का बहुत बड़ा भाग रोहिला क्षत्रियो के पास था उनके विषय मे बताये
ReplyDeleteजैसे बुंदेला, बघेला, चंदेला इसी तरह रोहिला
जो राजपूत कॉमेंट कर रहे है सबको राजपूत वंशावलि का ज्ञान नही है, रायकवार को निषाद बता रहे
ReplyDeleteसैथवार को क्षत्रिय लोग नहीं मानते हैं,ना ही इनके घर में कोई क्षत्रिय शादी करता है।
DeleteJo Kshatriya h unhe Manne ya na manne se kuch nhi hota.....tum jaise log hi bantate h...RPN Singh ki Haveli ja kr dekh lena...Gorakhpur me Kshatriya bant gye h isliye ghat gye h....Apas me hi ladte h sb mai hu Kshatriya mai hu Kshatriya bol kr..
Deleteसैंथवार मल्ल क्षत्रिय होते हैं जो पूर्वांचल में पाए जाते हैं ,जो सोलह महाजनपदो में से एक महाजनपद मल्ल था। जिसकी राजधानी कुशीनारा थी जो वर्तमान में कुशीनगर है,सैंथवार मल्ल नेपाल का भी क्षत्रिय वंश था ।
Deleteऔर गूगल करके नेपाल में मल्ल क्षत्रिय के बारे में पढ़ लेना उसके बाद कुछ बोलना
DeleteRaikwar Rajput bahut prachin Rajvash hai inka name to Jammu ke Raikagarh pe Raj karne se pada is vansh ke Ramayana kal ke king Bharat aur Mahabharata kal ke shakuni se bataya jata hai..isliye apni jankari pe itna ghamand nhi hona chahiye..is vansh ke maharaja vijay singh ji Ramnagar dhameri riyasat ke Raja hai adhik jankari chahiye to unke pass jakar miliye..
DeleteKya rajputo main Karmavat bhi hate hai kya
ReplyDeleteyadav kshatriya hote hai yaa nahi
ReplyDeleteयादव कब से क्षत्रिय हो गया
DeleteMalll Sainthwar Kis vansh ke kshatriya hai
ReplyDeleteTetiha @tantiya rajput belongs to solanki or suryavanshi is missing. ..our ex prime minister late chandra shekhar was also tetiha...चंद्रशेखर का जन्म 17 अप्रैल,(कुछ संदर्भो में 1 जुलाई ) 1927 को उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले के ग्राम इब्राहीमपुर में हुआ था। इनका कृषक परिवार था। ये सम्भवत सोलंकी राजपूत की ताँतिया शाखा में जन्मे थे,चंद्रशेखर का राजनीति के प्रति रुझान विद्यार्थी जीवन में ही हो गया था
ReplyDeleteचन्द्र शेखर आज़ाद ब्राह्मण थे
Deleteकृपया बताएं कि कछवाहा राजपूतों और मौर्य राजपूतों में कैसा संबंध हैं।
ReplyDeleteइनका मूल ठिकाना क्या है।
कृपया कर्मवार राजपूत के बारे मे कुछ बताए
ReplyDeleteकर्मवार क्षत्रिय__गहवार की शाखा है
Deleteगहवार_राठौड़ को ही कहा जाता है
वंश_सुर्रवंशी
गौत्र _ भारद्वाज
कुल देवी-माँ दुर्गा
प्रवर _ तीन
में भी कर्मवार क्षत्रिय हु
DeleteI'm also karmwar where is our historical palace...
DeleteKya rajpoot aur raghuwanshi ki shadi ho skti hai?
ReplyDeleteक्या पागलों वाले सवाल पूछे रहे हो
Deleteहो सकती है लेकिन बराबर के राजपूतो मैं जो सूर्यवंस का हो
DeleteGotra alag hona chahiye
Deleteमै कठेरिया राजपूत ठाकुर मुझे कठेरिया राजपूत का gotr बताओ
ReplyDeleteकठेहर रोहिलखण्ड के राजपूत संस्थापक कठगनराजय के स्वामी काठी कौम के सूर्य वंशी निकुम्भ क्षत्रिय है वशिष्ट ऋषि गोत्र के 909 में कठेहर राज्य की स्थापना हुई राजा रामसिंह ने रामपुर नगर की स्थापना की मूल रूप में काठी कठेहरिया कठौड कठायत ही रोहिलखण्ड के शासक थे जो निकुम्भ वंसी थे वशिष्ठ ऋषि गोत्र के बाद में राठौड़ चौहान वाछिल गहलोत आदि ने 1730 तक शासन किया सभी कठेहरिया राजपूत कहलाये
Deleteकठेरिया राजपूतों का गोत्र अरिष्टनेमी है।
Deleteमै कठेरिया राजपूत ठाकुर मुझे कठेरिया राजपूत का gotr बताओ
ReplyDelete38 ओर 39 क्रमांक पर सभी राजपूत वँशो के का शासन स्थान कठेहर रोहिलखण्ड लिखिए जब कहि बुन्देलखण्ड लिखा तो रोहिलखण्ड क्यो छोड़ा
ReplyDeleteकठेहरिया राजपूत वही काठी कौम है सूर्य वंशी निकुम्भ क्षत्रिय जिन्होंने सिकन्दर को रावी व व्यास नदियों के काठे में घेर कर मारा था पत्थरो में पटक पटक कर निहत्था कर दिया था और तक्षकों की 20000 सेना की मदद से बच निकला था अश्वक अजय राव को रौंदता हुवा इसके बाद कुछ काठी क्षत्रिय सौराष्ट्र की ओर कुछ पांचाल की तरफ मैदानों में आ गए वही काठी ओर कठेहरिया राजपूत है
ReplyDeleteकठेहर के राजपूत चौहान वाछिल राठौड़ गौड़ आदि राजपूत है सभी कठेहरिया राजपूत ओर रोहिले राजपूत कहलाते है सबके ऋषि गोत्र अलग अलग है
ReplyDelete67 क्रमांक पर पुण्डीर की गलत सूचना है,पुण्डीर सूर्य वंशी लव के वंसज है पुण्डरीक के वंसज ऋषि गोत्र पौलस्त्य है 1444 गॉंव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में है, हिमाचल उत्तराखण्ड में भी है उनका ऋषि गोत्र भारद्वाज बताते है वे लोग
ReplyDeleteपुण्डीर का कपिल से कोई सम्बन्ध नही
ReplyDeleteकुछ पुण्डीर स्वयम को चन्द्र वंशी बताते है महाराज पुंड्ररू के वंसज ऋषि गोत्र दाहिमा भारद्वाज धौम्य बताते है
ReplyDeleteOad Rajput bhi apne ap ko Rajput batate hai iske bare m batao kuch ye pdho or reply do please Open main menu
ReplyDeleteWikipedia Search
Orh
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The Orh are a Hindu caste found in the Indian state of Uttarakhand. They are also known as Mistri and Raj. They are Rajputs in orrisa by origin and from Odra kingdom and are descendants of King Sagara who was a kshatriya. Further they migrated to different states of India such as Uttar Pradesh and some regions of Madhya Pradesh who falls under general category.[1]
History
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The Orh are one of the communities of Dom origin found in the Kumaon and Garhwal divisions of Uttrakhand. Traditionally, they are kshatriya but later as per the conditions they also worked as masons. According to various sources, they originated in Western Nepal where many remain. They speak either Kumaoni or Garhwali, although most understand Hindi.[2]
In Pakistan they are Rajputs. Hindus and Muslims both, they live in the south-eastern province of Sindh in Pakistan. Believing that they are of Rajput (Raj means king) origin, even in Rajasthan they use Rajput[3] with their name and believe that the Orh king[4] King Bhagiratha was their ancestor.[5]
Rituals
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The Orh live in multi-caste villages in the middle altitudes of Kumaon and are strictly endogamous. Their society is internally segmented into patrilineages, locally called raths. The rath is an exogamous grouping of members sharing descent from a common ancestor.
Economy
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The hereditary calling of the Orh is kshatriyas and fighters, also with agriculture and animal husbandry as secondary occupations. Like many artisan castes, they have seen a decline in their traditional occupation of masonry, although many work in the commercial construction industry. They have a caste council, referred to as a panchayat, which resolves community disputes, such as elopement, theft or adultery.
Religion
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They follow Hinduism but incorporate many animistic practices. Their gods and deities are mostly of local origins such as Sheipal, who is their presiding deity, and his consort, Devi. Other important deities include Gangnath and Bhairav. Part of their belief is shamanistic.[6]
Shekhar rajput ke bare me jankari chahiye
ReplyDeleteक्षत्रिय दर्जी दर्जी जाति भी एक क्षत्रियों में भी आती है इन्हें कोई पिछली या नीची जाति ना समझे कछवाय चौहान जाति सिसोदिया गहलोत राजोरिया और भी जाती है यह सब दरजी छत्रिय से ही आती है
ReplyDeleteक्षत्रिय दर्जी दर्जी जाति भी एक क्षत्रियों में भी आती है इन्हें कोई पिछली या नीची जाति ना समझे कछवाय चौहान जाति सिसोदिया गहलोत राजोरिया और भी जाती है यह सब दरजी छत्रिय से ही आती है
ReplyDeleteक्षत्रिय दर्जी दर्जी जाति भी एक क्षत्रियों में भी आती है इन्हें कोई पिछली या नीची जाति ना समझे कछवाय चौहान जाति सिसोदिया गहलोत राजोरिया और भी जाती है यह सब दरजी छत्रिय से ही आती है
ReplyDeleteSaint hear mall rashtriya kon caste me ata h btao
ReplyDeleteSainthwar mall kashtriyar kon caste me ata h btao
ReplyDeleteRaghuvanshi rajput kha hai list ma
ReplyDeleteAre Only general category cast with title Singh known as kshatriya or Obc and sc category also kshatriya ?
ReplyDeleteक्या अर्कवंशी समाज क्षत्रिय है ? प्रकाश डाले?
ReplyDeleteरघुवंशी समाज अभी भी क्षत्रियो की मुख्य धारा में शामिल नही हो पाया है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में रघुवंशी समाज समगोत्रीय विवाह करते है, कुछ मित्रो द्वारा दी गयी जानकारी के आधार पर।
ReplyDeleteवैसे मित्र एक बात कहना चाहूंगा , अपने कर्म क्षत्रियो वाले रखिये , आप खुद ब खुद क्षत्रिय हो जायेगे ,किसी के कहने से कुछ नही होता है।
रही बात क्षत्रियो के मुख्यधारा में शामिल होने की तो 1988 में सूबेदार भगवादीन सिंह सोमवंशी (तत्कालीन महामंत्री अखिल भारतीय क्षत्रिय महासंघ) ने कई जातियों को क्षत्रिय की मुख्यधारा में शामिल किया था ।
उनमे से रैकवार, धूमल , इत्यादि जातियाँ है। कइयों ने आरक्षण के लालच के चलते क्षत्रिय बनने से इनकार कर दिया , वो आज आरक्षण का मजा ले रही है।
Raikwar Rajput to shuru se hi General caste hai inka gotra real me vashista hai..inki Riyasat hi Gandhar desh me thi
DeleteKhud desh ke defence minister v Raikwar Rajvash se hai Ish vansh ki zamindarI riyasat aaj v Rehwa aur Ramnagar dhameri kayam hai..Present ruler maharaja vijay singh ji hai kisi ochhi jati ke titles chori se Raikwar Rajput glory kam nhi hoti
Deleteसूर्यवंशी पाल क्षत्रिय भी राजवंश से संबंध रखते हैं
ReplyDeleteबंगाल के पाल शासक, इंदौर के होलकर शासक, मोर्य शासक,विजयनगर साम्राज्य के संस्थाक हरिया बुक्का, इसी वंश से संबंध रखने हा
ReplyDeleteपाल को आज (गडरिया) से जानते है जो जाति नबल्कि एक पेशा है औरये मूलत राजपुत है
ReplyDeleteआपका लेख पढ़ा
ReplyDeleteकाफी जानकारी प्राप्त हुई।
दरअसल सन् 1900 के बाद और खासकर 1950 के बाद जब शूद्र वर्ण की तमाम जातियों को पढ़ने लिखने व राजनीति के अवसर प्राप्त हुए तो इन निम्न जातियों के लोगों ने छुआछूत, भेदभाव व हीनभावना से बचने व अपनी मूल पहचान छुपाने के उद्देश्य से अपने नाम के साथ ऊंची जातियों के टाइटल लगाने प्रारंभ कर दिये।
जैसे - तेली ने राठौर
कुम्हार ने प्रजापति
बढ़ई ने शर्मा
काछी ने कुशवाहा
भुर्जी ने सक्सेना
गड़ेरिया ने पाल
धनगर ने बघेल
अहीर ने यादव
आदि।
अक्सर आज भी देखने को मिलता है कि निम्न जातियों के लोग जैसे चमार, भंगी, धानुक आदि जब कहीं बाहर शहरों में जाकर बस जाते हैं तो वह शर्मा, तोमर चौहान आदि लिखने लिखने लगते हैं।
कृपया
बघेल ठाकुरों के संबंध में (आज कुछ धनगर/गडरिया भी बघेल बन गए हैं) सही जानकारी हो तो बताने का कष्ट करें।
आपकी सोच ठीक नही है ।
Deleteकिसी भी जाति की लोगो की संख्यां करोड़ो मे हे, सभी लोग एक सुर मे एक राय सहमत होकर नहीं बोल सकते
हम ही वो गडरिया हे जो बघेल लिखते हे। ओर सूनौ हम नरवर गढ़ के हे ।आल्हा काव्य पढ़ ।हमारी होड़ ना होगी तुम से क्यू की हम आज भी चार गोत्र तोड़ के शादी विवाह करते हे।हमारे गोत्र मामा रेकवार,नानी मौर्य,दादी चंदेल,
Deleteश्रीनेत,भुवाल को तो आपने लिखा ही नई है
ReplyDeleteवो भी तो राजपूत है
गूगल में खोजे वीर बाबू बन्धु सिंह वो तो श्रीनेत है राजपूत है
तो श्रीनेत राजपूत को क्यो नई लिखे हो
Galat post h ye
DeleteSrinet ko hi bhul gya h.
Deleteआप आधा अधुरा ज्ञान लेकर चले हो राजपूतो की सूचि बानाने।आओ मेरे पास पुरे भारत के क्षत्रियो का सूचि दूँ। एक भाई ज्ञानेन्द्र सिंह लिख कॉमेंट में लिख रहे है।अभी रघुवंशियो को सूची में शामिल नहीं किया गया है। आप जाकर मतिराम के अनुसार 36 कुली देख सकते हो।राय कल्याणजी बडवा जी का वास जिला जयपुर ने 36 कुल की वाख्या की है उसको जाकर पढ़ो। अब मैं रघुवंशी का परिचय देता हूँ वैसे तो रघुवंशी भारत के कई राज्यो वर्तमान में है पर मैं वाराणसी के कटेहर परगना तथा जौंन पुर के डोभी परगना के रघुवंशियो के बारे में लिखुगा।अयोद्धया के दनुवा रियासत रघुवंशी रियायासत थी। जिस पर महाराज लव के वंशज करी राव (करीराय) के वंशज विरम देव के पुत्र बाबा नयनदेव सवंस 1207 में अयोद्धया के दनुवा रियासत सरयू नदी के उस पार का भाग अपने उपरोहित गौतम को तथा इस पार का भाग अपने छोटे भाई को देकर काशी चले आये काशी में चंन्द्रवंश के राजा वंदार(वनार)गहरवार का राज्य जो 96 छन्नू परगने के चकले दार थे उनकी राजकुमारी इन्दुमती थी जिनका विवाह नयन देव से होता है जिन्हें कन्या दान में जौंनपुर के डोभी परगना तथा वाराणसी के कटेहर परगना कन्या दान में दिए इन्ही नयन देव के पुत्र शाल्हे कुंवर हुए शाल्हे कुंवर के दो पुत्र नोनेराव तथा नगईराव,नोनेराव के वंशज जम्मू चले गए जो वहॉ के रियासत में वर्त्तमान है। नगईराव के वंशज डोभी,कटेहर,बंगाल,विहार,गाजीपुर,चंदौली में वर्तमान में है।आज कटेहर के अंदर रघुवंशी वंशावली पड़ी है जिसमे सतयुग,त्रेता,द्वापर,कलयुग में आज तक के गोंद, गोंद के वच्चो का वणर्न किया गया है। कटेहर तथा डोभी का रघुवंशियो गोत्र कश्यप है। एक और लिखता हूँ। गहरवार कई कई सूर्यवंश में लिख दिया गया। परंतु गहरवार चंद्र वंश की शाखा है। काशी से जीतनी भी निकली हुई शाखाए है वह सभी शाखाए चंद्रवंश की है।जरूर पड़ी तो हम काशी की उतपत्ति से लेकर उनके मुख्य मुख्य राजाओ का वर्णन कन्नौज के राजा जयचन्द से लेकर मांडा राज्य तक का वर्णन मिल जाएगा।गहरवार एक अच्छे राजपूत में आते है।
ReplyDeleteफिर रघुवंशियो की शादी अन्य राजपूतो मैं क्यो नही होती
DeleteBatao raghubansi je
DeleteJeengar rajput hote h ya nhi y bataye
ReplyDeleteArvind Singh baghel , baghel ranluta
ReplyDeleteKrishna singh Nagvanshi rajput
ReplyDeleteRawani rajput h hi nhi isme
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
DeleteBat jb kshatiye vansh ki ho rhi h to Jo prachin chandravanshi Kshatriya vansh me RAWANI smaj Ka etihash ko kyu dabaya ja rha h kuchh nakli milawati rajputo ke dwara. Jbki ye sarvvidit h ki Bihar ke Magadh smarat Jarasandh Maharaj ke vansaj hi RAWANI smaj h Jo chandravanshi Nam se Jana jata h ,OBC category me aata h.. Rawani smaj BrihdBRIhD (father of Jarasandh) KUL se BHI Jana jata h, jinka gotra bhardwaj h aur KUL DEVI Maa jara Devi h Jo anek namo se Jani jati h Jaise ban devi, Maa banni , Maa parmeshwari..Bihar ke Magadh smarat Jarasandh Maharaj se nikli huyi shakhanye hi aaj dusre state me khud ko rajputo me gine ja rhe h lekin Bihar Jharkhand me enki esthiti SC-ST se BHI dayniye bni huyi h....ye es esthiti me BHI nhi h ki chandravanshiyo ke abhiman enki pehchan ,Rajgir me esthiti Maharaj jarasandh ji Ka Akhara bhi sarnkshit nhi KR pa rhe h ...
ReplyDeleteजय राजपूताना होकम..
ReplyDeleteपरिहार राजपूत के बारे में जानकारी दीजिए..!!
एक क्षत्रिय नायक राजपूत भी होते है, जो क्षत्रिय में नायक पद से सम्मानित किए जाते थे,
ReplyDeleteलेकिन नायक एक जाती बंजारा भी है ।
इसलिए क्षत्रिय राजपूत नायक का कोई इतिहास ही नहीं मिल पाता बल्कि वो वास्तव में राजपूत ही है, सारे गोत्र राजपूत वंश से ही है, लेकिन अलग अलग वंश में जो नायक होते थे ।
लेकिन आज नायक राजपूत को लोग बंजारा नायक, या भील नायक समझते है।
जैसे गुजरात में ब्राह्मण में भी नायक, होते है वैसे राजपूत में भी नायक होते थे लेकिन मुख्य जाती राजपूत ही है।उसका कोई इतिहास बताए।
अरूण सिंह देवड़ा
एक नायक जाती अलग है ,जो कि बंजारा, भील ,थोरी ,भोपा होते है,
ReplyDeleteऔर राजपूत नायक अलग होते है। गोत्र सारे राजपूत ही है इनके
कछवाह ओर मौर्य दोनो कुश के वंशज है,मौर्य प्रचीन हे,जबकि कछवाह राजपूत कुशवाहा की थोड़ी नयी शाखा हे ,जो की अभी तक सत्ता मे थी, ओर उसको तथाकथित राजपूत से रिश्ते होते है।
ReplyDeleteचूंकि थोड़ी नयी शाखा होने के कारण इनकी संख्या कुशवाहा से बहुत कम है।
कछवाह ओर मौर्य दोनो कुश के वंशज है,मौर्य प्रचीन हे,जबकि कछवाह राजपूत कुशवाहा की थोड़ी नयी शाखा हे ,जो की अभी तक सत्ता मे थी, ओर उसको तथाकथित राजपूत से रिश्ते होते है।
ReplyDeleteचूंकि थोड़ी नयी शाखा होने के कारण इनकी संख्या कुशवाहा से बहुत कम है।
कछवाह ओर मौर्य दोनो कुश के वंशज है,मौर्य प्रचीन हे,जबकि कछवाह राजपूत कुशवाहा की थोड़ी नयी शाखा हे ,जो की अभी तक सत्ता मे थी, ओर उसको तथाकथित राजपूत से रिश्ते होते है।
ReplyDeleteचूंकि थोड़ी नयी शाखा होने के कारण इनकी संख्या कुशवाहा से बहुत कम है।
Uttrakhand me Aagri or Aagari kaun hote hai ... aur inka gotra kya hai ... kripya bataye..
ReplyDeleteJisko dekho Apne KO bada sabeet karne m
ReplyDeleteLaga h...sab Rajput khalana chahte h..rajput naam se nhi kaam se bano
Jab desh mugalon Ka gulaam howa tab tum kaha the...jab desh Aangrejon Ka gulaam howa tab tum log kaha gye the...m to sirf 3 rajputon Ka naam
Janta hon... pirthvi RajChuhan....naha
Rana Pratap..aur veer Shivaji....baki tum log us time chutti m gye the kya...Aa jate h Rajput banne...muh otja k....Rajput Ka matlab jante ho....
Srinet thakur ka itihaas batane ka last kare gotta bharadwaj Dhari devi kul devi
ReplyDeleteसम्राट सागर जी के वंशज राजा ओड राजपूत थे जिन्होंने अपने नाम ओड का आधार पर ओडिशा/उड़ीसा को बसाया था ओर उस पर राज्य किया था तथा ओड राजपूत सुर्य वंश हैं ।ओड राजपूतो की ज्यादा जानकारी के लिए यह पुराण पढ़ें ।
ReplyDelete1-स्कन्द पुराण पेज नम्बर-270
2-महाभारत के सभापर्व पंचम वेद,अध्याय 4 श्लोक 24
not fare matter
ReplyDeleteपडरौना से पूरब सेमरा लक्ष्मीपुर बतरौली अमवा आदि गांव के क्षत्रिय लोग किस वंश गोत्र से है लोग
ReplyDeleteक्या क्षत्रिय कुमावत राजपूत होते है। राजस्थान का अधिकांश कुम्हार समाज कुमावत लगाता है। लेकिन कुछ कुमावत जोकि कुम्हार नही है वो खुद को भाँतिराजपूतो के वंशज बताते है व ये दावा करते है कि वो राजपूत है। कृपया करके कोई इस समस्या का हल बताये। की क्या ये क्षत्रिय कुमावत भी राजपूत होते है क्या।
ReplyDeleteडाबी/डाभी राजपूत राजवंश की जानकारी मिल सकती है?
ReplyDeleteWe need information about Dabhi/Dabi Rajput?
ReplyDeleteAp sabhi log se vinamr nivedan hai ki agr ap m se kisi ko bhi son vansi k barr m kuchh bhi jankari hai to plz mujhe bataiye,actually m chhapra jila k taraiyan block k pas mera ghr hai but mujhe is k bare m bishesh nhi pta,son vandhi kuchh log khte hain ki hastinapur se ayr the,kuchh khte hain kihm log pandav bansaj hai actually mujhr puri detail chahiye,somebody plz hrlp me
ReplyDeletePlease bahreliya Rajput ka itihas bataiye
ReplyDeletePlease baghela ya Vaghela Rajput ke bare me bataiye. Gotar kuldevi vansj detail dijiye. Ham aapke bahut aabhari honge
ReplyDeletePatel ke bare mein bataiye Patel Khurmi
ReplyDeleteSABIR ALI JAISWAR GOOD JANKARI
ReplyDeleteSABIR ALI JAISWAR...Good jankari thanks
ReplyDeleteक्या किसी के पास राजपूत के गोत्र नागलछ की जानकारी है? कृपया बताएं।
ReplyDeleteभाई राठौर क्षत्रियों का गोत्र कश्यप है
ReplyDeleteBadgujar rajpoot clane is from shree LAV son of shree ram .very ancient rajpoot gotra.most of the dundhad area was ruled by them .including sariska alwar dausa bahror jaipur
ReplyDeletekarnat vansh ke baare mein bataiye. kon sa vansh hai ye rajputon ka.
ReplyDeleteरजवार तो SC हरिजन जाति से आता है तो फिर राजपुत कैसे हुआ
ReplyDeleteकटियार तो सुर्यवंशी क्षत्रिय कुर्मी जाति से आता है तो फिर राजपूत कैसे हुआ
ReplyDeleteबघेल , चंदेल और जैसवार ये सब सुर्यवंशी क्षत्रिय कुर्मी जाति में आता है तो राजपुत कैसे हुआ
ReplyDeleteये प्राचीन क्षत्रिय है न की राजपूत।
Deleteबिसेन /सैंथवार और मल जाति सब के सब सुर्यवंशी क्षत्रिय कुर्मी जाति से आते है कुछ मादरचोद लेखक ने तोडने का कोरसिस कर दिया
ReplyDeleteDabi Rajput Nahi h isme
ReplyDeleteगहरवार क्षत्रिय की वंशावली किसी के पास हो तो जानकारी दीजिये
ReplyDeleteBahreliya rajput ke bare mai bhi btao yrr koi
ReplyDeleteRuhela Rajput Thakur gotra namel
ReplyDeleteLodh rajput list me nhi hai
ReplyDeleteभारतीय इतिहास में सबसे लम्बी अवधि तक शासन करने वाले छोटानागपुर के नागवंशी क्षत्रिय २००० वर्षो तक लगभग
ReplyDeleteदिक्खित ही पाण्ड्य वंशी है
ReplyDeleteDahiya क्या है राजपूत है है तो कृपया ए बताय ki राठौर se कैसे बना राठौर शाखा se दहिया जानकारी देने के लिए कृपया करे kiyo ki dahiya alag alag राज्यो me nai jaese हरियाणा में दहिया जाट लिखते हैं up मे bhi लेकिन राजस्थान में दहिया राजपूत है mp कुछ ंnhi है
ReplyDeleteAapne rawani rajput ka nam. Nahi joda
ReplyDeleteमेरा नाम dr indra deo singh है । मैं बैश हु ।
ReplyDeleteमेरा घर लालगंज तहसील आज़मगढ़ में है ।
हमारे यहाँ 200 गांव बैशो का है । किसी भी प्रकार की सूचना या संशोधन हेतु सूचित करें
इन्द्र deo singh
9305586683 whtapp
बैश इतिहास से कोई भी सूचना हो तो हमे सूचित करें
ReplyDeleteसादर
Dr indra deo singh
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