शोभना सम्मान-2012

Friday, December 7, 2012

राजपूत एकता


जय माता जी की 

क्या हम राजपूत हैं.......
आज हम राजपूतो की हालत क्या हो गयी है इस  विषय पर चिन्तन की सख्त जरूरत है. आज हम अपनी ठकुराईस के चलते बुरे हालातो में पहुँच चुके हैं हमारी शिक्षा ,हमारा रहन सहन ,खान पान और हमारी शान न जाने कहाँ धूमिल हो गयी है. सोचिये इसके जिम्मेदार कौन हैं.....? 
क्या इस स्थिति के लिए हम स्वयं जिम्मेदार नही हैं हमारी एकता न होना और बेवजह की झूठी शान के कारण आज हम इस हालत में हैं की न जाने कितने राजपूत अपनी जमीने खो बैठे हैं यहाँ तक कि खाने के लिए दो वक़्त की  रोटी के भी लाले पड़ गये हैं.....
फिर भी आज हम अपने समाज ,अपने आने वाली पीढ़ी के बारे में सोचना नही चाहते. जिन महान वीरो का हम गुणगान करते नही थकते उनकी एक बात का भी हमने ख्याल नही रखा या सदा के लिए दुर्भाग्य से नाता जोड़ लिया है.
आज जैसे हम अपने पूर्वजो का गुणगान करते हैं, आगे आने वाली हमारी नस्ल क्या हमें ऐसे ही याद करेगी नही कभी नही ...अब भी वक़्त है जागो...उठो...और एक हो फिर से परचम लहरा दो अपना ,,,,दिखा दो सबको कि इस देश पर राज़ करने के असली हक़दार हम ही हैं. आज वक़्त आ गया है कि हम अपने आप को मजबूत कर एक हो आगे बढे.
मैं  समझती हूँ कि हमारे बिखराव के कारण ही आज हमारे ये हालात हैं जैसे मुस्लिमों  में फतवा जारी कर दिया जाता है काश वैसे ही हमारे समाज में भी किसी ने राजपूतो के लिए किया होता तो कोई ऐसा नेत्रत्व  हमारा भी होता जो पत्थर की  लकीर समझा जाता.....काश ऐसा होता.....
ये दर्द हर राजपूत के दिल में है लेकिन आगे नही बढ़ना चाहते ...एक नही होना चाहते ...
कहावत है .....जो बछड़ा दूध पीने को खड़ा नही हुआ 
उससे हल में चलने कि उम्मीद क्या करना 
अगर आज भी आप नही उठे और पूरे समाज को साथ नही जोड़ा तो तरक्की कि बाते तो दूर हमारे हालत बाद से बदतर हो जायेंगे .......जय जय श्री राम....

द्वारा - सुश्री शिखा सिंह 


2 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर लेख लिखा दिल को छू गया हम बडी हम बडी के चक्र मे बरबाद हो रह फिर भी नही समझ रह है

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